gustaakh kabootar

रविवार, 5 जुलाई 2015

पहली उड़ान

आज शुरुआत हुई है।
मुझे नहीं लगता की मै देर से हु , क्यूंकि बात दर असल यह है की मै  ठहरा एक बेरोजगार भारतीय कबूतर  ,
बेरोजगारी के करारे थपड खाए है मैंने और अभी भी खा ही रहा हूँ , मन कहाँ भरा है अभी। … पर  शुक्र है खुदा का की ऐसी करारी मार के बाद भी मेरी याददाश्त दुरुस्त है।
तोह देखते है कितने है , जो मेरे दुखड़े से रूबरू होना चाहेंगे। …… क्या है की लोगों को दूसरों की फजीहत देखने में जितना मजा आता है , बाई गॉड उतना तोह खुद की इज्जत में नहीं आता।
और हाँ , मैं तुम इंसानों की बात कर रहा हूँ , हम कबूतरों की तो बात ही कुछ और हैं....

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